Sunday, February 22, 2009

मुझसे पहले..........

मुझसे पहले तुझे जिस शख्स ने चाह उसने
शायद अब भी तेरा ग़म दिल से लगा रक्खा हो
एक बेनाम सी उम्मीद पे अब भी शायद
अपने ख्वाबों के ज़ज़ीरों को सजा रक्खा हो।

मैंने माना की वह बेगाना-ए-पैमाने वफ़ा
खो चुका है जो किसी और की रानाई में
शायद अब लौट के न आए तेरी महफिल में
और कोई दुःख न रुलाये तुझे तन्हाई में।

मैंने माना की शबो-रोज़ के हंगामों में
वक्त हर ग़म को भुला देता है रफ्ता रफ्ता
चाहे उम्मीद की शमए हों की यादों के चराग
मुस्तकिल बो'दा बुझा देता है रफ्ता रफ्ता

फ़िर भी माजी का ख्याल आता है गाहे गाहे
मुद्दतें दर्द की लौ कम तो नही कर सकतीं
ज़ख्म भर जायें मगर दाग तो रह जाता है
दूरियों से कभी यादें तो नही मर सकतीं

यह भी मुमकिन है की एक दिन वह पशेमा होकर
तेरे पास आए ज़माने से किनारा कर ले
तू की मासूम भी है जूद-फरामोश भी है
उसकी पैमा शिकनी को भी गवारा कर ले

और में, जिसने तुझे अपना मसीहा समझा
एक ज़ख्म और भी पहले की तरह सह जाऊँ
जिस पे पहले भी कई अहदे वफ़ा टूटे हैं
उसी दोराहे पे चुप-चाप खड़ा रह जाऊँ।

(ahmed faraz)

Friday, January 30, 2009

long time.......

so i m back on my blog after a long time. so many reasons behind it but mainly exams. these were the toughest of papers i have ever given. i was so scared. for a whole month i was thinking whether i would pass or not. whether i would be able to remember anything in exam hall or not. i have never gone through this kind of tension before. maybe these all are the effects of migraine. anyways exams are over and i think i m going to get good marks. i know i dont deserve to be the topper this time and i dont even wish to be the one. i wish that for some one else.
another reason for not writting is that i didn't knew what to write. i have not read any good book in last two months. whatever i read didn't touch my heart. so maybe next time i would be able to write something more meaningful.
so i think thats it for today.........

Monday, November 24, 2008

एक और शेर.......

उंगलियाँ आज भी इस सोच में गम हैं फ़राज़,
उसने किस तरह नए हाथ को थमा होगा।
(अहमद फ़राज़)

आज कल ये नया शौक आया है मुझे। अहमद फ़राज़ की लिखी हुई नज़्मेऔर शेर पढ़ने का। ऑरकुट पर अहमद फ़राज़ की कम्युनिटी में जब ये शेर पढ़ा तो एक ही बार में दिल को छू गया। हर वो इंसान जिसने प्यार में धोका खाया है शायद बरसों-बरस इसी सोच में गम रहता है। सच ये है की कितना भी क्यूं न सोच लिया जाए कोई फर्क नही पड़ता। कुछ लोग दुनिया में आते ही धोके-बाज़ी के लिए हैं। ऐसे ही लोगों के दिए हुए ज़ख्मो को बड़ी ही खूबसूरती से बयान करता है ये शेर।
मेरी बीमारी ठीक होने का नाम नही ले रही है। जैसे जैसे वक्त गुज़रता जा रहा है, सर का दर्द और भयानक होता जा रहा है। मैंने अपने पुराने रिश्तों को भुला दिया है। नए सिरे से शुरुवात करना चाहती हूँ, नए नज़रिए के साथ। पर तबियत है की साथ ही नही देती। सब कहते हैं की कुछ दिनों बाद दर्द की दवाइयाँ भी अपना असर बंद कर देती हैं। यही चाहती हूँ की वो नौबत आने से पहले ठीक हो जाऊँ। हे भगवान्! मेरी मदद करो।

Thursday, November 6, 2008

ख्वाब.......

ख्वाब मरते नहीं,
ख्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें के जो,
रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जायेंगे
जिस्म की मौत से ये भी मर जायेंगे।

ख्वाब मरते नहीं,
ख्वाब तो रौशनी हैं, नवा हैं, हवा हैं,
जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नही
रौशिनी और नवा और हवा के आलम
मक्तालों में पहुँच कर भी झुकते नहीं।

ख्वाब तो हर्फ़ हैं
ख्वाब तो नूर हैं
ख्वाब तो सुकरात हैं,
ख्वाब मंसूर हैं।

(अहमद फ़राज़)


Monday, October 13, 2008

मुझे तेरी मुहब्बत का ..............

इस गाने के बारे में ज्यादा कुछ नही जानती। बस इसे कुछ दिन पहले पहली बार सुना 'rafi reconstructed' नाम के कार्यक्रम में, जब सोनू निगम ने ये गाना गाया। इस गाने की धुन और शब्द कुछ ऐसे हैं की दिल को छू गए। गाना कुछ इस प्रकार है,

दिल शाद था की फूल खिलेंगे बहार में,
मारा गया गरीब इसी ऐतबार में।

मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता,
अगर तूफां नही आता किनारा मिल गया होता।

न था मंजूर किस्मत को,
न थी मर्ज़ी बहारों की,
नही तो इस गुलिस्ता में
कमी थी क्या नज़रों की,
मेरी नज़रों को भी कोई नज़ारा मिल गया होता,
अगर तूफा नही आता किनारा मिल गया होता।
मुझे तेरी........................

खुशी से अपनी पलकों को,
में अश्को से भिगो लेता,
मेरे बदले तू हंस लेती,
तेरे बदले में रो लेता,
मुझे ए- काश तेरा दर्द सारा मिल गया होता,
अगर तूफा नही आता किनारा मिल गया होता।
मुझे तेरी.......................


मिली है रौशनी जिनको,
ये उनकी अपनी किस्मत है,
मुझे अपने मुकद्दर से,
फकत इतनी शिकायत है,
मुझे टूटा हुआ कोई सितारा मिल गया होता,
अगर तूफा नही आता किनारा मिल गया होता,
मुझे तेरी..............